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मानस संगम के मंच तले मनाई गई भव्य तुलसी जयंती

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तुलसी उपवन ने आध्यात्मिक विरासत को बचाकर रखा : दिनेश शर्मा

सामाजिक समरसता के प्रतीक थे गोस्वामी तुलसीदास : नीलिमा कटियार

अरविन्द पाण्डेय

कानपुर। अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संस्था मानस संगम की ओर से मोतीझील स्थित तुलसी उपवन में 45वां तुलसी जयंती समारोह श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भक्तियोग मिशन के आचार्य योगेश जी महाराज और पं. आचार्य गणेश जी की राम स्तुति एवं कजरी गायन से हुई। डॉ. रेणु निगम और मनीषा सिंह ने भी संगीत प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा ने तुलसीदास के साहित्य और रामचरितमानस के सामाजिक प्रभाव पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि बाबा तुलसीदास ने रामचरितमानस के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को घर-घर तक पहुंचाया। उन्होंने तुलसी उपवन में संरक्षित आध्यात्मिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि मानस संगम परिवार ने तुलसीदास की स्मृतियों और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का उल्लेखनीय कार्य किया है।


युवाओं को रामचरितमानस से जोड़ने पर जोर

दिनेश शर्मा ने कहा कि रामचरितमानस को केवल पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके मूल संदेश और आदर्शों को जीवन में उतारना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने और परिवारों में संस्कारों को मजबूत करने की आवश्यकता है।

उन्होंने तुलसी उपवन को रामायण सर्किट से जोड़ने की मांग को भी सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास के लिए ऐसे स्थलों को पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाना महत्वपूर्ण है।

प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दया शंकर मिश्र 'दयालु' ने तुलसी उपवन की सराहना करते हुए कहा कि यहां रामायण के विभिन्न पात्रों को जीवंत स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के दौर में गोस्वामी तुलसीदास ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया।

विधायक नीलिमा कटियार ने कहा कि तुलसीदास सामाजिक समरसता के प्रतीक थे। उन्होंने स्वर्गीय बद्री नारायण तिवारी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके संस्कारों और प्रयासों ने कानपुर की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का काम किया।

एमएलसी अरुण पाठक ने रामचरितमानस को सनातन परंपरा का जीवंत दर्शन बताते हुए कहा कि इसके विभिन्न पात्रों से जीवन के अलग-अलग मूल्यों की सीख मिलती है। सांसद रमेश अवस्थी ने भी रामचरितमानस को मानव चरित्र निर्माण का महत्वपूर्ण स्रोत बताया। उन्होंने कानपुर के स्वतंत्रता आंदोलन और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए पद्मश्री श्यामलाल गुप्त 'पार्षद' के झंडा गीत के योगदान को याद किया।

तुलसी उपवन को रामायण सर्किट से जोड़ने की उठी मांग

समारोह में तुलसी उपवन को बिठूर की तर्ज पर रामायण सर्किट में शामिल करने की मांग उठाई गई। मानस संगम के अध्यक्ष विजय नारायण तिवारी 'मुकुल' और डॉ. प्रदीप दीक्षित ने इस संबंध में दिनेश शर्मा, सांसद रमेश अवस्थी और विधायक नीलिमा कटियार को ज्ञापन सौंपा। साथ ही स्वर्गीय देहदानी डॉ. बद्री नारायण तिवारी की आदमकद प्रतिमा तुलसी उपवन में स्थापित किए जाने की मांग भी रखी गई।

कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री श्यामलाल गुप्त द्वारा रचित झंडा गीत को राष्ट्रीय गौरव दिलाने के लिए सांसद रमेश अवस्थी द्वारा लोकसभा में 'राष्ट्रीय ध्वज गीत विधेयक' प्रस्तुत किए जाने पर उन्हें मानस संगम की ओर से विशेष सम्मान दिया गया। वहीं लोकगीत एवं पारंपरिक गायन के क्षेत्र में योगदान के लिए कविता सिंह को डॉ. बद्री नारायण तिवारी स्मृति सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में कविवर दीन मोहम्मद दीन, कवि दिलीप दुबे और कवि अनिल दीक्षित ने काव्य प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता बालयोगी अरुण चैतन्यपुरी जी महाराज ने की। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस प्रेम और मानवीय मूल्यों की सीख देती है तथा परिवार, समाज, प्रकृति और प्रत्येक व्यक्ति के प्रति प्रेम का संदेश देती है।

कार्यक्रम का संयोजन विजय नारायण तिवारी 'मुकुल' ने किया, जबकि संचालन डॉ. प्रदीप दीक्षित और मनोज सेंगर ने किया। इस दौरान प्रभाकर श्रीवास्तव, राजेश पाठक, गौरव पाठक, एडवोकेट जीतेन्द्र सिंह, डॉ. रमेश वर्मा, अनिल कुमार शर्मा, मुकेश श्रीवास्तव, सुनील दुबे, उमंग अग्रवाल, श्याम अरोड़ा, डॉ. बीना सिंह, डॉ. बीएन त्रिपाठी, अरुण कुमार मिश्रा, संजय बाजपेई, संजय त्रिवेदी, रजोल शुक्ला, सुरेश गुप्ता, अभिनव तिवारी, सतीश तिवारी, राम गोपाल समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम से लौटते समय डॉ. दिनेश शर्मा ने प्रयाग नारायण शिवाला मंदिर के दर्शन किए और मंदिर के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी ली।

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